जुगनू जुगनू है पता है, नहीं सूरज लेकिन
कुछ अन्देहरा तो कटता है भला क्या कम है
मुकुल सरल
Wednesday, March 17, 2010
Monday, August 13, 2007
ये धोखा है कोई सवेरा नहीं है
करें क्या शिकायत अंधेरा नहीं है
अजब रौशनी है कि दिखता नहीं है
ये क्यों तुमने अपनी मशालें बुझा दीं
ये धोखा है कोई, सवेरा नहीं है
अजब रौशनी है कि दिखता नहीं है
ये क्यों तुमने अपनी मशालें बुझा दीं
ये धोखा है कोई, सवेरा नहीं है
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