Monday, August 13, 2007

ये धोखा है कोई सवेरा नहीं है

करें क्या शिकायत अंधेरा नहीं है
अजब रौशनी है कि दिखता नहीं है

ये क्यों तुमने अपनी मशालें बुझा दीं
ये धोखा है कोई, सवेरा नहीं है

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